दिन में कई बार रंग बदलता है यह शिवलिंग #news4
October 2nd, 2020 | Post by :- | 185 Views

हिमाचल प्रदेश के जिला किन्नौर में यह शिवलिंग समुद्र तल से 17200 फिट की ऊंचाई पर स्थित है। क्योंकि ये हिमाचल के दुर्गम स्थान पर स्थित है इसलिए यहां न तो आपको बहुत भीड़ मिलेगी और न ही यहां के प्राकृतिक सौंदर्य को छेड़ा गया है। दुर्गम पहाड़ों का सफर करने के बाद दर्शन होते हैं किन्नर कैलाश के, जो दिन में कई बार रंग बदलता है।

पहाड़ की चोटी पर स्थित इस शिवलिंग की एक खास बात ये है कि शिवलिंग बार-बार रंग बदलता रहता है। मान्यता है कि इस शिवलिंग का रंग हर पहर में बदलता है। ये सुबह कुछ और रंग का दिखता है, दोपहर को सूरज की रौशनी में इसका रंग अललग दिखता है और शाम होते होते ये रंग फिर से अलग दिखने लगता है। ये पार्वती कुंड नामक झील के नजदीक स्थित है ।

किन्नर कैलाश के बारे में अनेक मान्यताएं भी प्रचलित हैं। कुछ विद्वानों के विचार में महाभारत काल में इस कैलाश का नाम इन्द्रकीलपर्वत था, जहां भगवान शंकर और अर्जुन का युद्ध हुआ था।

कैलाश मानसरोवर यात्रा तो आपने कई बार सुना होगा लेकिन बहुत कम ही लोग हैं जिन्होंने सावन में होने वाले किन्नर कैलाश यात्रा के बारे में सुना होगा। तिब्बत स्थित कैलाश मानसरोवर के बाद किन्नर कैलाश को ही दूसरा सबसे बड़ा कैलाश पर्वत माना जाता है। सावन का महीना शुरू होते ही यहां पर बाबा के भक्तों का सैलाब लगना शुरू हो जाता है। हिमाचल प्रदेश की इस जगह को सबसे खतरनाक भी कहा जाता है। किन्नर कैलाश सदियों से हिंदू व बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए आस्था का केंद्र है। इस यात्रा के लिए देश भर से लाखों भक्त किन्नर कैलाश के दर्शन के लिए आते हैं। किन्नर कैलाश पर प्राकृतिक रूप से उगने वाले ब्रह्म कमल के हजारों पौधे देखे जा सकते हैं।

पार्वती कुंड में सिक्का डालने से होती है मन की मुराद पूरी
गणेश पार्क से करीब पाच सौ मीटर की दूरी पर पार्वती कुंड है। इस कुंड के बारे में मान्यता है कि इसमें श्रद्धा से सिक्का डाल दिया जाए तो मुराद पूरी होती है। लोग इस कुंड में नहाने के बाद करीब 24 घंटे की चढ़ाई के बाद किन्नर कैलाश स्थित शिवलिंग के दर्शन करने पहुंचते हैं।

कल्पा से यहां के लिए पैदल यात्रा होती है, मगर रास्ते में ठहरने का कोई उचित स्थान नहीं है। या तो आपको अपना टैंट ले जाना होगा या रास्ते में पड़ने बाली छोटी गुफाओं में रात बितानी होगी। यहां ठंड बहुत होती है ऐसे में रात के लिए गर्म कंवल जरूर रखें।

भगवान शिव की तपोस्थली किन्नौर के लोगों और हिंदू भक्तों की आस्था का केंद्र किन्नर कैलाश समुद्र तल से 24 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है। हर साल सैकड़ों शिव भक्त जुलाई व अगस्त में जंगल व खतरनाक रास्ते से हो कर किन्नर कैलाश पहुंचते हैं। किन्नर कैलाश की यात्रा शुरू करने के लिए भक्तों को जिला मुख्यालय से करीब सात किलोमीटर दूर राष्ट्रीय राजमार्ग-5 स्थित पोवारी से सतलुज नदी पार कर तंगलिंग गाव से हो कर जाना पड़ता है।

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