तकनीकी शिक्षा, जनजातीय विकास मन्त्री डॉ रामलाल मार्कण्डेय ने ‘स्नो फ़ेस्टिवल, के ‘राइंक जातर’ में पारम्परिक लोक संस्कृति के रंगों के उत्सव में शिरकत की #news4
February 28th, 2021 | Post by :- | 140 Views

तकनीकी शिक्षा, जनजातीय विकास मन्त्री डॉ रामलाल मार्कण्डेय ने ‘स्नो फ़ेस्टिवल, के ‘राइंक जातर’ में पारम्परिक लोक संस्कृति के रंगों के उत्सव में शिरकत की

केलांग से करतार कौशल की रिपोर्ट

डॉ मार्कण्डेय आज ‘फ़ेस्टिवल ऑफ फ़ेस्टिवलस’- ‘स्नो फ़ेस्टिवल’ में शिरकत करने अपनी द्विदिवसीय दौरे के दूसरे दिन कीर्तिंग पहुंचे, यहाँ उन्होंने राइंक जातर में मुख्यातिथि के रूप में भाग लिया । यहां स्थानीय लोगों ने उनका पारम्परिक तरीके से स्वागत- सम्मान किया।कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों को पारम्परिक व्यंजन चिलड़ा, मन्ना, सिड्डू आदि के सभी परोसे गए। विशेष आकर्षण का केन्द्र रहा ‘क्यूरपी’ का प्रदर्शन, जोकि गंदम को चुरू द्वारा थ्रेशिंग की , पारम्परिक विधि है।

इसके अतिरिक रंगारंग कार्यक्रम में महिला मण्डल मेलिंग, राशेल, कीर्तिंग, शांशा, ढवांशा तथा युवा कल्ब कीर्तिंग की प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया। इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह उत्सव जनसहभागिता से मनाया जा रहा है जिसमें सरकार की ओर से कोई ख़र्च नहीं किया जा रहा। भविष्य में हम ‘स्नो फ़ेस्टिवल’ को उदन से शुरू कर के 90 दिनों तक चलाएंगे और उदन,हालडा, योर, आदि पारम्परिक उत्सवों को लिखित साहित्य के रूप में लिपिबद्ध किया जाएगा। डॉ मार्कण्डेय ने कहा कि पहली बार साहसिक खेलों के लिए हमारी सरकार ने नीति बनाई है।

 


गर्मियों में पैराग्लाइडिंग, ट्रेकिंग आदि खेलों का आयोजन किया जाएगा। तीरंदाज़ी की राज्यस्तरीय प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इस वर्ष आइस हॉकी, में स्पिति की टीम ने तीसरा स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने कहा कि नृत्य, गायन, वादन हमारी संस्कृति का अंग है। कृषि को छोड़ना नही बल्कि बागवानी व पर्यटन से जोड़ना है। ताकि हम लाहौल के सौंदर्य से देश दुनियां को रूबरू करवा सकें।
उन्होंने सांस्कृतिक प्रस्तुतिओं के लिए प्रत्येक महिला मण्डल को 10 हज़ार व ‘रानीका जातर’ आयोजन समिति के लिए 21000, देने की भी घोषणा की।

 

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