वैज्ञानिकों ने पेप्टिक अल्सर के बैक्टीरिया का जल्द पता लगाने की खोजी तकनीक #news4
October 4th, 2020 | Post by :- | 89 Views

वैज्ञानिकों ने पेप्टिक अल्सर पैदा करने वाले बैक्टीरिया का जल्द पता लगाने की नई तकनीक खोज ली है। वैज्ञानिकों ने सांस में पाए जाने वाले ब्रीथ प्रिंट नामक बायोमार्कर की मदद से पेप्टिक अल्सर पैदा करने वाले बैक्टीरिया की शीघ्र पहचान की तकनीक खोज ली है।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) ने शनिवार को बताया कि यह तरीका कोलकाता स्थित एसएन बोस नेशनल सेंटर फॉर बेसिक साइंसेज के वैज्ञानिकों ने खोजा है।

डीएसटी के बयान के अनुसार, टीम ने मानव सांस में अलग-अलग जल समस्थानिकों का पता लगाने के लिए ब्रेथोमिक्स’ विधि भी कहा जाता है। इसके तहत मानव सांस में विभिन्न जल आणविक प्रजातियों के अध्ययन का उपयोग किया। टीम ने मानव सांसों को छोड़ने में एचडीओ में बैक्टीरिया हेलिकोबैक्टर पाइलोरी की खोज के लिए नए बायोमार्कर को पहचाना है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि जल्दी इलाज न किया जाए तो हेलिकोबैक्टर पाइलोरी से होने वाला पेट का संक्रमण गंभीर हो सकता है। आमतौर पर इसे एंडोस्कोपी और बायोप्सी परीक्षणों द्वारा खोजा जाता है। हालांकि, इनमें शुरुआती स्तर पर पहचान नहीं हो पाती है।

वैज्ञानिकों ने हाल ही में विभिन्न गैस्ट्रिक विकारों और हेलिकोबैक्टर पाइलोरी बैक्टीरिया संक्रमण को खोजने के लिए पायरो-ब्रीथ उपकरण विकसित करके उसका पेटेंट करवाया है।

वैज्ञानिकों ने बताया कि इस तकनीक से डॉक्टर मरीज की छोड़ी हुई सांस के ब्रीथ प्रिंट से पता लगा लेंगे कि पेट में सामान्य संक्रमण है, अल्सर है या फिर कैंसर जैसा कोई घातक रोग है। वैज्ञानिकों ने कहा कि रोगी के सांसों के सैंपल से ही पेट के रोग की शुरुआती स्तर पर ही पहचान हो जाएगी।

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