नेचर टूरिस्ट गाईड करवाएंगे पर्यटकों को तीर्थन की वादियों के साथ ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क की सैर। #news4
July 26th, 2021 | Post by :- | 1703 Views

नेचर टूरिस्ट गाईड करवाएंगे पर्यटकों को तीर्थन की वादियों के साथ ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क की सैर।

तीर्थन घाटी के शाईरोपा में चार दिवसीय नेचर टूर गाइड प्रशिक्षण शिविर का हुआ समापन।

ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क से छीन भी सकता है विश्व धरोहर का तगमा, विशेषज्ञों ने चेताया।

गाइड बोले पर्यटकों को सैर सपाटे के साथ साथ देंगे पर्यावरण संरक्षण का संदेश।

पार्क क्षेत्र को संरक्षित करने के लिए स्थानीय समुदाय के साथ मिलकर करेंगे सांझा प्रयास- निशान्त मंढोतरा.

तीर्थन घाटी गुशैनी बंजार(परस राम भारती):-
जिला कुल्लू की तीर्थन घाटी ने हिमाचल के पर्यटन मानचित्र पर अपना एक विशेष स्थान बना लिया है जिस कारण साल दर साल यहां पर देसी विदेशी पर्यटकों की आमद में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। विश्व धरोहर ग्रेट हिमालयन नेशनल नेशनल पार्क में पाए जाने वाली जैविक विविधता, यहां की शान्त और सुरम्य वादियाँ, प्रदूषण मुक्त वातावरण, नदियां, नाले, झरने और यहां के पारंपरिक मेले और त्यौहार सहज ही सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। पर्यटन यहां के लोगों के लिए आजीविका का एक मुख्य जरिया बनता जा रहा है। अब यहां के युवा टूरिस्ट गाइड बनकर बाहर से आए सैलानियों को ग्रेट हिमालयन नेशनल और तीर्थन की वादियों में सैर सपाटा करवाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देंगे। इसलिए पार्क प्रबंधन द्वारा यहां के 30 स्थानीय युवाओं को भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून के सौंजय से कौशल विकास कार्यक्रम के तहत चार दिवसीय नेचर टूर गाईड का प्रशिक्षण दिया गया।

तीर्थन घाटी के पार्क कार्यालय शाइरोपा में 22 जुलाई से आरम्भ चार दिवसीय नेचर टूर गाईड प्रशिक्षण शिविर का समापन रविवार को वन मण्डल अधिकारी शमशी निशान्त मंढोतरा ने किया है। उन्होंने इस कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून से आए विशेशज्ञों और प्रतिभागियों का आभार प्रकट किया है। इन्होंने कहा कि किसी भी टूरिस्ट गाईड को हाजिर जबाब होना जरूरी होता है जिसके लिए उसे यहां के इतिहास, आर्थिकी , संस्कृति और भूगौलिक परिपेक्ष का पूरा ज्ञान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्व धरोहर स्थल ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क को संजोए रखने की जिमेवारी सबकी बनती है। पार्क क्षेत्र को संरक्षण व संवर्धन के लिए स्थानीय समुदाय के साथ मिलकर सांझा प्रयास किये जाएंगे। इन्होंने बताया कि स्थानीय लोगों के लिए समय समय पर उपयोगी प्रशिक्षण कार्यक्रम चलते रहेंगे ताकि वे आत्मनिर्भर बनकर स्वरोजगार से जुड़ सके। इस अवसर पर वन मण्डल अधिकारी निशान्त मंढोतरा द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी बांटे गए।

यह प्रशिक्षण पार्क क्षेत्र के इको जॉन में रहने वाले उन 30 स्थानीय युवाओं को दिया गया है जिन्होंने तीर्थन रेंज कार्यालय शाईरोपा में बतौर गाईड अपना पंजीकरण करवा रखा है। कौशल विकास कार्यक्रम के तहत भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून से आए विशेषज्ञों ने इस प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को अपने अपने लम्बे तुजर्बे से जवाबदेह एवं दीर्घकालिक पर्यटन संचालन गाइडिंग के हर पहलू पर प्रकाश डाला है। भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून से आए डॉक्टर भूपेश सिंह , डॉक्टर आनंदिता देवव्रत, डॉक्टर चीतेश जोशी, डॉ गौतम और भारतीय पर्यटन एवं यात्रा प्रबंधन संस्थान ग्वालियर से आए डॉक्टर रमेश देवरत ने इस चार दिवसीय कार्यशाला के दौरान प्रशिक्षुओं को टूरिस्ट गाईड के नियमों और बारीकियों से अवगत करवाया है। इन्होंने सभी यहां पर सैर सपाटे के लिए आने वाले सैलानियों के साथ बातचीत करने के जरूरी टिप्स भी बताए हैं।

भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून के प्रशिक्षक डॉ. भुपेश ने बताया कि एक टूरिस्ट गाईड का शारीरिक व मानसिक रूप से सक्षम होना बेहद जरूरी होता है। इन्होंने कहा कि टूरिस्ट गाईड पर्यटकों के लिए एक मार्गदर्शक का काम करता है जो बाहरी राज्यों से आए हुए पर्यटकों को अपने क्षेत्र की भगौलिक, समाजिक और सांस्कृतिक परम्पराओं लोक रीति रिवाजों तथा सुन्दर जगहों से वाकिफ करवाता है।

भारतीय पर्यटन एवं यात्रा प्रबंधन संस्थान ग्वालियर मध्यप्रदेश से आए डॉक्टर रमेश चन्द्र देवरत ने प्रतिभागियों को पर्यटन के क्षेत्र में गाईड की भूमिका और दीर्घकालिक पर्यटन संचालन की बारीकियों के बारे में विस्तार से ज्ञानवर्धन किया है। उन्होंने बताया कि अब तीर्थन घाटी में घूमने आने वाले सैलानियों को स्थानीय प्रशिक्षित गाइड के माध्यम से यहां की जैविक विविधता, विभिन्न प्रजातियों के पेड़ पौधों, पक्षियों, वन्यजीवों और यहां की प्राचीनतम संस्कृति के बारे में सही व सटीक जानकारी हासिल होगी। इन्होंने बताया कि टूरिस्ट गाइड पर्यटकों को जिस भी स्थान पर घूमने के लिए ले जाता है उस स्थान की उसे पूरी जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने ये भी बताया कि अगर टूरिस्ट कोई सवाल पूछता है तो कैसे उसे रोचक ढंग से जबाब देकर सन्तुष्ट किया जा सकता है। इसके अलावा एक टूरिस्ट गाइड को अपने अतिथि पर्यटक की सुरक्षा का भी ख्याल रखना चाहिए।

भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून से आए विशेषज्ञों ने विश्व धरोहर ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क की अहमियत पर भी प्रतिभागियों को विस्तार से जानकारी दी है। इन्होंने बताया कि बहुत लम्बी प्रक्रिया के बाद इस नेशनल पार्क को विश्व धरोहर का दर्जा मिला है जो अब इस धरोहर विरासत को संजोए रखना यहां के लोगों की जिमेबारी बनती है। इन्होंने विश्व धरोहर ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क की जैविक विविधता पर मंडरा रहे कुछ खतरों से भी आगाह करवाया है। इन्होंने बताया कि पार्क क्षेत्र में बढ़ता भूमि कटाव, प्रदूषण, अवैध शिकार और जड़ी बूटियों का दोहन तथा गैर जिमेदारना पर्यटन से इस धरोहर के लिए खतरा पैदा हो गया है। विशेषज्ञों ने चेताया है कि अगर समय रहते हुए इन खतरों पर ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य में यहां से इस विश्व धरोहर का तगमा छिन भी सकता है। इसलिए सभी की जिमेबारी बनती है कि इस इस विश्व धरोहर स्थल का वखूबी तौर पर संरक्षण एवं संवर्धन किया जाए।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे स्थानीय युवा कुलदीप सिंह, घनश्याम, चंद्रकांत, शिव कुमार, राजेश ठाकुर, दीपक कुमार, मनीष, विजय ठाकुर, उपेंद्र ठाकुर, रमाकांत, योगेश, आर्यन प्रभात, प्रेमचंद, तरुण ठाकुर, प्रदीप शलठ, रमेश, संजय भारती, गजेंद्र ठाकुर, धनु राम, जगदीश, धनेश्वर, सुरेंद्र, नवल किशोर, दुष्यंत सिंह, चमन लाल, नीना देवी और डेविड कुमार आदि का कहना है कि यह प्रशिक्षण निश्चित रूप से ही इनके लिए उपयोगी साबित होगा। इन्होंने कहा कि अब ये यहां पर आने वाले पर्यटकों को घुमने फिरने के साथ साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देंगे। इनका कहना है कि आजकल यहां पर टूरिस्ट गाईड के पेशे को एक प्रतिष्ठित कार्य के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि इस पेशे में अपना घुमने फिरने का शौक भी पुरा हो जाता है और साथ में अच्छी कमाई भी की जा सकती है। इस पेशे से मिलने वाली आमदनी आपको मिलने वाले काम पर निर्भर करती है। इन्होंने बताया कि अनाधिकृत एवं अप्रशिक्षित गाइडों के कारण घाटी के पर्यटन व्यवसाय पर विपरीत असर पड़ सकता है इसलिए उपरोक्त गाइडों ने पार्क प्रबन्धन से मांग की है कि पार्क क्षेत्र के इको जॉन और कोर जॉन में बाहरी तथा अनाधिकृत गाइडों पर प्रतिबन्ध लगाया जाए और प्रशिक्षित स्थानीय गाइडों को प्राथमिकता के आधार पर काम दिया जाए।

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