किस्सा गुरुद्वारे का:पाकिस्तान में एक गुरुद्वारा, जहां रुके थे गुरु नानक देव जी; 72 साल बाद श्रद्धालुओं के लिए खोला गया था
November 30th, 2020 | Post by :- | 92 Views

प्रथम पातशाही श्री गुरु नानक देव जी के 551वें प्रकाश पर्व हम आपको बता रहे हैं, पाकिस्तान में मौजूद एक गुरुद्वारे के बारे में, जिसे 72 साल बाद श्रद्धालुओं के लिए खोला गया था। मान्यता है कि गुरु नानक देव इस स्थान पर ठहरे थे। वह जोगियान मंदिर से लौट रहे थे, तब यह जगह सूखे से जूझ रही थी। कहा जाता है कि गुरु नानक देव ने यहां अपने बेंत से जमीन पर मारा और एक पत्थर फेंका, जिसके बाद यहां प्राकृतिक झरने (चोहा) का पता चला।

इस गुरुद्वारे का नाम है चोआ साहिब गुरुद्वारा, जो पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में मौजूद है। इसमें सिखों की गहरी आस्था है, जिसे 550वें प्रकाश पर्व श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया था। विभाजन के बाद से बंद इस गुरुद्वारे को खोलते समय भारत के सिख श्रद्धालु भी मौजूद थे। सिख समुदाय के लोग इसे खोलने की लंबे समय से मांग कर रहे थे और जब इसे खोला गया तो समारोह के दौरान केसरी निशान साहिब के साथ पाकिस्तानी झंडे भी लहराए गए।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, 1947 में सिख समुदाय के लोगों के पाकिस्तान से चले जाने के बाद से गुरुद्वारा बंद था। इसके बाद इस गुरुद्वारे की उपेक्षा होती रही। विश्व विरासत स्थल रोहतास किले के करीब बने इस गुरुद्वारे को उच्च अधिकारियों और सिख समुदाय के लोगों की उपस्थिति में खोला गया। इस दौरान यहां भव्य कार्यक्रम भी आयोजित किया गया था। गुरुद्वारा खोलने की प्रक्रिया अरदास और कीर्तन से शुरू हुई थी।

बता दें कि महाराजा रणजीत सिंह ने इस गुरुद्वारे को बनवाने का काम शुरू किया था। गुरुद्वारा 1834 में बनकर पूरा हुआ। 1834 में महाराजा रंजीत सिंह द्वारा गुरुद्वारा साहिब के भवन का निर्माण करवाया गया था। गुरुद्वारा साहिब का भवन तीन मंजिला है, जिसमें 23 खिड़कियां और चार-चार फुट चौड़ी दीवारों का निर्माण किया गया था। 72 वर्ष तक बंद रहे गुरुद्वारा साहिब में बनी भित्ति चित्रकला लगभग लुप्त हो चुकी है।

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