30 अन्य योजनाएं भी परिवर्तित वन भूमि का इंतकाल नहीं होने से अधर में हैं फंसी ..
November 21st, 2020 | Post by :- | 132 Views

प्रदेश के विकास के लिए आवश्यक तीस अन्य योजनाएं भी अभी तक परिवर्तित वन भूमि का इंतकाल नहीं होने से संबंधित यूजर एजेंसी को नहीं दी जा सकी हैं। राजस्व विभाग ने केंद्रीय विश्वविद्यालय के बहाने सभी लंबित मामलों का ब्योरा भी सार्वजनिक कर दिया है। राजस्व मंत्री महेंद्र सिंह ने बताया कि 16 दिसंबर 2015 से जल शक्ति विभाग की उठाऊ जलापूर्ति योजना के निर्माण कार्य को 4.2691 हेक्टेयर वन भूमि परिवर्तित करने, 11 दिसंबर 2017 से जिला शिमला के वन भूमि अधिकार क्षेत्र में राजकीय महाविद्यालय चायल कोटी और उच्चतर शिक्षा विभाग लालपानी शिमला में शिक्षा विभाग के पक्ष में 01-39-96 हेक्टेयर वन भूमि, 11 दिसंबर 2018 से जिला कांगड़ा की केंद्रीय विश्वविद्यालय देहरा के सेटेलाइट
कैंपस स्थापित करने को उच्चतर शिक्षा विभाग के पक्ष में 81-79-16 हेक्टेयर भूमि, 2 सितंबर 2006 से लाहौल-स्पीति के उदयपुर में तकनीकी शिक्षा विभाग के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान के निर्माण कार्य को 25-05-00 बीघा भूमि, 25 मई 2018 से सोलन के मौजा अडुवाल में उद्योग विभाग के पक्ष में बायो टेक्नालॉजी पार्क स्थापित करने को 12.4239 हेक्टेयर भूमि, 14 सितंबर, 2017 से जिला शिमला के राजकीय महाविद्यालय धामी के लिए शिक्षा विभाग के पक्ष में 01-02-97 हेक्टेयर भूमि, 2 मार्च 2017 से जिला कांगड़ा के नगरोटा बगवां में वर्कशॉप के लिए परिवहन निगम के पक्ष में 0-90-36 हेक्टेयर भूमि परिवर्तित करने के मामले लंबित हैं।
21 फरवरी 2012 से मंडी के सुकेत वन मंडल के अधिकार क्षेत्र में तहसील सरकाघाट के पपलोग में प्रशिक्षण विद्यालय के निर्माण को परिवहन निगम के पक्ष में 2.68 हेक्टेयर वन भूमि परिवर्तित करने, 7 नवंबर 2019 से जिला सिरमौर के नाहन वन मंडल में अंधेरी (काला अंब) एमवीए उप केंद्र के लिए हिमाचल पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन के पक्ष में 5.494 हेक्टेयर वन भूमि, 5 मई 2017 से कांगड़ा के बाबा बड़ोह बस स्टैंड के लिए बस स्टैंड मैनेजमेंट एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी के पक्ष में 0.4608 हेक्टेयर वन भूमि परिवर्तित करने के मामले लंबित हैं। सैकड़ों मेगावाट की पावर प्रोजेक्टों की कई परियोजनाएं भी अटकी हैं।

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