वैज्ञानिकों की बढ़ी चिंता, रूप बदल रहा कोरोना वायरस, क्या बेकार हो जाएगी वैक्सीन ?
June 28th, 2020 | Post by :- | 202 Views

दुनिया में कोरोना मरीजों की संख्या शनिवार रात 1 करोड़ के पार हो गई। इनमें 54 लाख 58 हजार 367 लोग ठीक हो चुके हैं। वहीं, 5 लाख 01 हजार 298 लोगों ने जान गंवाई हैं। सबसे संक्रमित देश अमेरिका में 24 घंटे में 40 हजार से ज्यादा मामले सामने आए हैं। यहां मरीजों की संख्या 25 लाख से ज्यादा हो गई है। वहीं, अब तक 1।28 लाख मौतें हो चुकी हैं। उधर, ब्राजील में संक्रमण के मामले 13 लाख से ज्यादा हो गए हैं। वहीं, 57 हजार लोगों की जान जा चुकी है। एक तरफ कोरोना के बढ़ते मामले चिंता का विषय बने हुए है वहीं कोरोना की वैक्सीन बना रहे वैज्ञानिकों के सामने एक और बड़ी मुश्किल सामने आ रही है। दरअसल, कोरोना वायरस अपना रूप बदल रहा है। इसी वजह से वैज्ञानिक इस चीज को मॉनिटर करने में जुटे हैं कि SARS-CoV-2 में किस तरह का आनुवांशिक (Genetic) बदलाव हो रहा है।

हालाकि, npr.org में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना वायरस में बदलाव तो हो रहा है, लेकिन अब तक जो जानकारी मिली है उसके आधार पर कहा जा सकता है कि ये बदलाव इतना अधिक नहीं है कि वैक्सीन बेकार हो जाए। स्विट्जरलैंड के बसेल यूनिवर्सिटी में महामारी मामलों की जानकार एम्मा हॉडक्रॉफ्ट कहती हैं- कोरोना वायरस में जो भी म्यूटेशन हो रहा है या जिस स्पीड से हो रहा है, इसमें घबराने जैसी कोई बात नहीं है।

जॉन्स हॉपकिन्स अप्लाइड फिजिक्स लैब के सीनियर साइंटिस्ट पीटर थीलेन का कहना है कि आज की तारीख तक, बहुत कम म्यूटेशंस मिले हैं। अब तक हमने जो देखा है, संभवत: उसका वायरस के काम करने के तरीके पर कोई असर नहीं होता। थीलेन ने कहा कि आज कोरोना वायरस के 47 हजार Genomes इंटरनेशनल डेटाबेस में स्टोर किए गए हैं। Genomes की स्टडी से ये पता चलता है कि वायरस में किस प्रकार का बदलाव हो रहा है।

साइंटिस्ट पीटर थीलेन का कहना है कि जब भी दुनिया के किसी हिस्से से कोई वैज्ञानिक इंटरनेशनल डेटाबेस में नया Genomes डालते हैं तो उसकी स्टडी की जाती है। उन्होंने कहा कि उल्लेखनीय बात ये है कि आज जो भी वायरस फैल रहे हैं, वे चीन में मिले पहले वायरस की तरह ही हैं। पीटर थीलेन कहते हैं कि जनवरी में कोरोना के लिए जिस तरह की वैक्सीन डेवलप की जाती, आज भी उसी तरह की वैक्सीन तैयार करने की कोशिश की जा रही है।

एम्मा हॉडक्रॉफ्ट कहती हैं कि फिलहाल हमें कोई वैक्सीन मिल सकती है। लेकिन बड़ा सवाल है कि क्या वैक्सीन एक बार देना होगा या फिर हर कुछ साल के बाद वैक्सीन को अपडेट करने की जरूरत होगी? हॉडक्रॉफ्ट की मानें तो इस सवाल का जवाब अभी अनिश्चित है, क्योंकि SARS-CoV-2 अभी काफी नया है। समय बीतने के साथ हो सकता है इसमें बदलाव भी देखे जाए।

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